गुरु बड़ा की भगवान Guru Bada Ki God Through this story we will know that Guru is big that God is big



गुरु बड़ा की भगवान इस स्टोरी के माध्यम से हम जानेंगे गुरु बड़ा है कि भगवान बड़ा है

बहुत समय पहले की बात है एक बार बेरागिनी नाम की एक बहुत बड़ी भगवान विष्णु की भगत थी जो हमेसा

और हमेशा भक्ति में लीन  थी ,

उनके साथ एक   बहुत बड़ी घटना घटित होती है जिसका हम जिक्र कर रहे हैं और कहते हैं दोस्तों की अगर आपको कोई  साधु के भेष में दिख   रहा है तू जरूरी नहीं है कि वो  साधु हो और अगर आपको कोई कोई बड़े ज्ञानी की तरह दिख रहा है तो जरूरी नहीं है क्यों ज्ञानी हो

वह चोर के भेष में साधु आता है और दरवाजा खटखटाना शुरू करता है बहुत देर हो जाती है बे रागिनी बाहर नहीं निकलती है क्योंकि वह अपनी भगवान की भक्ति में बहुत लीन थी   काफी देर होने के बाद वह दूशरी बार  दोबारा से दरवाजा खटखटा आता है और कहता हैं   कोई है घर पर तो वैरागनी   को उसकी आवाज सुनाई दी जाती है और वह  दरवाजे से बाहर निकलती है और बोलती है  जी साधु महाराज बताइए हम आपके लिए क्या कर सकते हैं साधु बोलते हैं हम तो साधू है  हमें क्या चाहिए हमें तो दान दक्षिणा चाहिए,

 

तू हां साधु की बात को सुनकर घर के अंदर जाती है और कुछ बाहर लेकर आती है तो चोर के भेष में साधु में वैरागनी को कहते हैं कहते हैं हम तुम्हारे से दक्षिणा क्यों ले तुम तो एक भगवान के भगत हो अगर तुम भगत हो तो पहले तुम हमें बताओ कि तुम्हारे गुरु का क्या नाम है,  तुम्हारा गुरु कौन है वैरागनी उसकी बात को बड़े ध्यान से सुनते और बोलती है मेरा तो कोई गुरु नहीं है मैं तो बस अपने भगवान की भक्ति में लीन हूं मुझे तो सिर्फ उसी से मतलब है साधु  बोलता है कि वह सारी बातें तो आपकी ठीक है पर हम केवल मात्र उसी से ही दान  लेते हैं जिनका कोई गुरु होता है बिना गुरु के शिष्य से हम नहीं लेते हैं स्वरागिनी काफी देर सोची और बोलती है महाराज आप भी तो मुझे बहुत बड़े साधु प्रतीत होते हैं तो आप ही मेरे गुरु बन  जाओ  आप ही मुझे गुरु दक्षिणा दे दीजिए,

 

तो चोर साधु उसकी बात को सुनता है और बोलता है ठीक है हम आपको वह दक्षिणा के देने के लिए तैयार है वैरागनी बोलती है ठीक है तो आप मुझे  गुरु दक्षिणा देने  की कृपा  मैं  आज से में आपकी  शिष्य आप मेरे गुरु

साधु  बोलते हैं अरे नहीं नहीं नहीं हम ऐसे दक्षिणा नहीं देते हैं दक्षिणा लेने के लिए आपको हमारे साथ हमारे साथ हमारे डेरे  चलना पड़ेगा वही आपको दक्षिणा देंगे साधु की बात को मान लेती है और साथ चल पड़ती हैं.

चोर साधु देखता है देखता है भाई यह तो खाली जा रही है उसका मैं क्या करूंगा तो उसको बोलता है अरे आप मेरे शिष्य बनने जा रहे हो और ऐसे खाली हाथ जाओगे तो मुझे गुरु दक्षिणा कैसे डोगे आपके पास जितना भी धन दौलत है सारा ले आओ और वह  जितना भी उसके पास धन होता है दौलत थी वह  सब को दो गांठो में बांध कर  ले आती हैं काफी दूर चलने के बाद नकली साधु  बोलता हैं गया हमारा स्थान बस अब

मुझे आप क्यों बांध रहे हो हो, तो साधु बोलता हैं बस आप बंधे रहना और जब तक में आपको खोलूं तब तक मत खुलना ,

उसके बाद साधु धन से भरी हुई उन दोनों गठरियाँ   को अपने कंधों पर उठाता है और वहां से चला जाता है तो पूरा दिन बीत   जाने के बाद लड़की के जो पिताश्री   ढूंढते ढूंढते वह जंगल में पहुंच जाता हैं

 

और बोलता हैं पुर्त्री तुम्हे  किसने पेड़ से बांध दिया है तो वह बोली   कि मेरे एक गुरु है और  मुझे बोल कर गए हैं कि जब तक मैं तुम्हें ना खोलो तब तक मत खुलना  नहीं तो मैं तुम्हें गुरु दक्षिणा नहीं दूंगा, तो  पिताश्री होते हैं बोलते हैं वह कोई साधु नहीं था  वह तू एक चोर था  जो तुम्हारा सारा धन दौलत  लूट के ले जा चुका है और अब वह वापिस  नहीं आने वाला है, तो उसकी बात को सुनने के बाद वह बोलते हैं कोई बात नहीं बस मुझे बंधे  रहने दीजिए तो राजा बोलते नहीं नहीं मैं तुम्हें खोल देता हूं तुम घर चलो, तो बोलती है आप मेरे पिताश्री  हैं मैं आपकी बहुत इज्जत करती हूं पर खोलूंगी तो मैं अपने गुरु से ही नहीं तो नहीं खुलूँगी  उसकी उसकी बात को सुनकर घर वापस चले जाते हैं और 2 दिन बीत जाते हैं वह चोर था वह वापस नहीं आने वाला था उसने जो लूटना था  वो उसने लुटे लिया था अब उसको किसी से क्या लेना देना था ,  तो 2 दिन बाद भगवान विष्णु देखते हैं कि भी मेरी भक्त  2 दिन से पूजा नही कर रही हैं मंदिर में घंटिया नहीं बज रही क्या बात हो गई ,  कंहाँ चली गई  तो उसके बारे में  में पता करने के लिए  नारद जी को भेजा जाता हैं की जाओ और पता करो की क्या हुआ हैं.

 

नारद मुनि जी के घूमते उसको एक जंगल में बंधे हुए देख लेते हैं तो नारद मुनि जी वहां आते हैं उसके पास और उसको देखते ही वह उसको प्रणाम करती है तो नारद  जी बोलते हैं क्या आप मुझे जानते हो तो वह  बोलती है महाराज आप को कौन नहीं जानता आपको तो पूरी दुनिया जानती है, तो नारद जी पूछते हैं देवी  तुम्हें किसने बांध रखा है वही उसको अपनी कहानी बताती है बोलते हैं में तुम्हे  खोल देता हूं वो नहीं आने वाला वह एक एक चोर था, वहां केवल चोरी करने के माध्यम से आया हुआ था, और जो तुम्हारे पास जो था उसको लेके जा चुका है , अब वह नहीं आने वाला तो काहलो देवी में तुहें खोल देता हूं, पर वैरागनी  बोलती है मैं आपका आदर करती हूँ आपका बहुत सम्मान करती हूं और आपको नमन करती हूं, पर मैं अपने गुरु के अलावा किसी से नहीं करूंगी नहीं खोलूंगी तो नारद  जी दोबारा से वापस भगवान विष्णु जी के पास पहुंच जाते हैं और बोलते हैं हे प्रभु वह किसी से नहीं खुलने वाली है अब तो मुझे लगता है कि आपको भी चलना पड़ेगा तो भगवान विष्णु अपने चतुर्भुज रूप धर के वहां पहुंच जाते हैं  रूप धर के वहां पर पहुंच जाते हैं और वैरागनी  को अपने दर्शन देते हैं वैरागनी  उनको देखकर बहुत खुश होती है और उनको प्रणाम करती है तो भगवान उनको बोलते हैं कि चलो अब तो मैं स्वयं चुका हूं , तो चलो मैं अब आपको खोल देता हूं, पर वह वही फिर से बोलती हैं की प्रभु में आपको नस्कार करती हूँ आप मेरे पूजनीय हो  मैं आपकी भगत हूं और मैं  इसलिए मेरा आप को शत-शत नमन, पर हे प्रभु मैं केवल मात्र अपने गुरु से ही खुलूँगी  नहीं तो मैं नहीं खुलूँगी  तो भगवान परेशान हो जाते हैं और कहते हैं  नारद जी अब आप जाइए और इनके गुरु को  ढूंढ के लाइऐ  तो नाराज ही बोलते हैं प्रभु मैं कहां ढूंडू में उनको  उनका  कोई एक दिखाना तो है , तो प्रभु बोलते हैं चोर ही तो हैं वो कही बड़ी जगह चोरी का प्लान कर रहा होगा तो जाये आपको मिल जायेगा.  तो नारद जी जाते हैं और उनको ढूंढना स्टार कर देते हैं.  एक जगह जहां पर उनको मिल जाता है एक किसी बड़े शहर में जाकर वहां एक चोरी का प्लान कर रहा था   तो नारद जी उनको प्रणाम करते हैं तो डर जाता है, पर नारद जी बोलते हैं डरने की कोई बात नहीं हैं  आप हमारे साथ चलिए  प्रभु ाओको खुद बाला रहे हैं.

 

 

नारद जी आगे बोलते हैं जी बोलते हैं जिस शिष्य  को आप पिछले 4 दिन पहले जंगल में बांधकर आए थे बस उसी को खोलने के लिए आपको  लेकर जाना है जिसको बांध कर आप भूल गए हैं. वह किसी की नहीं मान रही है तो जो चोर था वह डरता हुआ उनके साथ जाता है और कौन जाता है उस जगह पर भगवान विष्णु को प्रणाम करते हैं बोलते गुरुदेव उनको तो आप ही खलोए , तो  देखा जाए वही गुरु बड़ा था क्योंकि उसको इतने टाइम भक्ति करते हो चुके थे भगवान तो नहीं मिले थे उस चोर के आते ही देखो सबसे पहले उनको  नारद जी के दर्शन हो गए  बाद चतुर्भुज भगवान विष्णु के दर्शन हो गए तो जैसी ही चोर उनको खोलता है तो  वैरागनी  बहुत ही एक अच्छेशब्द  बोलती हैं. 

 

 गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय।

बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय।।








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